Kundalini Jaagaran ka Saral tareeka kya hota hai ?
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| The flow of Cosmic Energy |
Kundalini Jaagaran
श्रृष्टि चक्र
जीव और प्रकृति का सम्बन्ध :-
अर्थात जैसे इस ब्रह्माण्ड का क्रमिक संचलन होता है ठीक वैसे ही हमारे शरीर का भी निर्वहन होता है.
भाषा में थोडा सा ट्विस्ट है क्योंकि व्याख्या बहुत लम्बी और अनंत है !!
शरीर का उर्जा और जीवन चक्र :-
हम जो जो भी पदार्थ भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं वह सब पेट में आमासय में पक-कर रस रूप में परिवर्तित होकर विल्ली द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं. यह अवशोषित धातुएं रक्त के माध्यम से शरीर की मूलभूत इकाई cell अर्थात उतकों तक पहुचती है. जिससे शरीर की प्राथमिक इकाईयां पोषित होती है.
जिनके पोषण से शरीर के सम्बंधित अंग-प्रत्यंग उर्जावान बनते हैं और हमारा पूरा शरीर शक्तिशाली बनता है. इससे हम अपने जीवन के दैनिक कार्यों को सम्पादित करते करते, बड़े होकर सफल नागरिक बनते हैं.
उपरोक्त वर्णन सामान्य जैविक वर्णन है.
तो सामान्य व विशेष में क्या फर्क है ?? उसे समझने के लिए हम पहलवान के उदाहरण से समझते हैं, कि वह कैसे जीवन में लम्बा , . . . . . . . दैनिक और नियमित अभ्यास और साधना करके एक सफल पहलवान बनता है जो अपने वर्ग में सफलता के कीर्तिमान स्थापित करता है.
ठीक इसी तरह से सभी लोग प्रयास करके अपने अपने क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ते हैं और जीवन यापन करते हैं.
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