7/23/2020

Journalist Vikram Joshi Murder Case Vijay Nagar Ghaziabad

Journalist Vikram Joshi का Murder Ghaziabad के Vijay Nagar इलाके में केवल इसलिए कर दिया गया क्योकि वह बदमाशों को अपनी भांजी को छेड़ने से रोकता था और उनके खिलाफ उसने पुलिस में कम्प्लेन कर रखी थी.

Journalist Vikram Joshi Murder Case Vijay Nagar Ghaziabad
Journalist Vikram Joshi

Journalist Vikram Joshi Murder Case Vijay Nagar Ghaziabad


पत्रकार विक्रम जोशी हत्याकांड एक ऐसा हत्याकांड है जिसकी कल्पना तक कर पाना कठिन है. 
क्या एक व्यक्ति की हत्या केवल इस बात के लिए हो सकती है की वह समाज के एक स्तम्भ, पत्रकारिता से जुड़ा हो ?
क्या एक व्यक्ति की हत्या केवल इसलिए भी हो सकती है कि वह, अपने परिवार की बहन बेटियों की हिफाजत करना चाहता है ? क्या एक व्यक्ति की हत्या इस लिए भी हो सकती है कि वह, एक जागरूक नागरिक के अपने कर्तव्यों का पालन करने को तत्पर रहता है ?

ऐसे कई सारे प्रश्न आज वातावरण में तैर रहें हैं, जो चिल्ला-चिल्ला कर प्रश्न पूछ रहें है कि, एक महिला को उसकी सुरक्षा की गारंटी देना, मौत का कारण कैसे हो सकता है ? जब अपने भी अपनों की रक्षा नहीं कर पाएंगे तो फिर कौन किससे सुरक्षा की गारंटी मांगेगा और कौन किसको, किसके भरौसे से ये गारंटी दे पायेगा.

सामाजिक सुरक्षा का ताना बना :- 

प्राचीन समय से ही मनुष्य के जीवन में कुछ ना कुछ मान-मर्यादा के पारिवारिक, सामाजिक और प्रशाशनिक मान दण्ड निर्धारित किये गये थे. ऐसी व्यवस्थाएँ जीवन को केवल निर्बाध चलाने के लिए ही नहीं की गयी थी अपितु सामाजिक स्तर पर ऐसे अनेकों चेक व बैलेंस हर स्तर पर लगाये गए थे, ताकि मनुष्य का चंचल मन निरंकुस ना हो. वह किसी भी स्थिति में इतना ना गिरे की वह. . . . . किसी की हत्या ही कर दे. राम-राम-राम आज ऐसा क्यों हो रहा है की सारी व्यवस्थाएँ . . . . . तार-तार होकर छिन्न-भिन्न सी प्रतीत हो रहीं हैं.
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7/19/2020

Ram Mandir ka Nirmaan का शुभारंभ करेंगे PM मोदी जी

Ram Mandir ka Nirmaan का शुभारंभ करेंगे PM मोदी जी, लगभग 500 वर्षों की तपश्या के पुन्य का फल प्राप्त होने में अब कोई विलम्ब नहीं.  जय श्रीराम.

Bhavy Ram Mandir
प्रभु श्रीराम जी का मंदिर 

Ram Mandir ka Nirmaan का शुभारंभ करेंगे PM मोदी जी 


आंखे बंद करूँ या खोलूं, मुझको दर्शन दे देना .
मुझको दर्शन दे देना, प्रभु मुझे दर्शन डे देना.

आंखे बंद करूँ या खोलूं, मुझको दर्शन दे देना .

जय श्री राम


श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन, हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि, नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल, चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर, संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर, शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो, वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील, स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय, सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि, मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

जानी गौरी अनुकूल सिय, हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम, अङ्ग फरकन लगे।

गोस्वामी तुलसीदास रचित प्रभु श्रीराम वंदना 



आज मन बहुत प्रसन्न है ईश्वर का शासन बड़ा अद्भुत है. उसकी लीला उसकी माया का कोई आरपार नहीं जान सकता. कितनी विचित्र घटना है, की सनातन धर्म का पालन करने वाले देश में प्रभु श्रीराम 500 वर्षों तक बेघर द्वार रहे . . . . . . !!!

भविष्य में आज से सेकड़ों वर्षों बाद जब जब प्रभु नाम पर चर्चा होगी तो इन बीते वर्षों को भी प्रभु श्री राम के बेघर-बार वास के रूप में याद किया जायेगा.

मन व्यथित हो जाता है . . . . . . . ये सोच करके, . . . . . . कि ये उसी भारतवर्ष के इतिहास का कालखंड है जहाँ ईश्वर को 500 वर्ष का घर निकाला रहा. . . . . . . !!!

प्रश्नों की अनंत श्रृंखला मष्तिष्क में उमड़ -घुमड़ने लगती है. . . . . हे मर्यादा की मूर्ति . . . . . क्यों ऐसा आदर्श स्थापित किया . . . . . जिसने जीते जी 14 वर्ष का बनवास कराया और युगों युगों बाद भी 500 वर्षों का "बेघरवास "  करवाया.

धन्य है प्रभु आपकी लीला . . . . . हजारों-हजारों करके लाखों लोग 500 वर्षों तक संघर्ष करते रहे तब जाकर. . . . . . . अब वह शुभ घडी आने वाली है जब . . . . . आपके भवन रूपी मंदिर का शिलान्यास, आपके दिव्य सेवक नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी के कर कमलों से होगा.

पूरी त्रिलोकी उस पुन्य घडी का बेसब्री से इन्तजार कर रही है. . . . . . जय श्रीराम.

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7/07/2020

हिंदी, हिन्दू, हिन्दुस्थान की traditional life style कैसी थी

हिंदी, हिन्दू, हिन्दुस्थान की परंपरागत जीवन शैली Traditional life style 

सब्जी की खेती, ग्रामीण जीवन शैली
गाँव में सब्जी की पैदावार 
बहुत पुरानी बात नहीं है जीवन में धन का प्रमुख स्थान तो था ही किन्तु धन के लिए लूट मार जैसी स्थितियां नहीं थी. परंपरागत जीवन इतना सरल था की थोड़े से धन में भी गुजर बसर हो जाती थी. बच्चे घर की टाटी पे चढ़ के रसोई के दो तीन महीने का इंतज़ाम आसानी से कर देते थे। कभी खपरैल की छत पे चढ़ी लौकी महीना भर निकाल देती थी। कभी बैसाख में दाल और भात से बनाई सूखी कोहडौड़ी सावन भादो की सब्जी का खर्चा निकाल देती थी‌। अनाज घर भर के खाने के लिए पर्याप्त हो ही जाता था.

ग्रामीण जीवन की खुशहाली :-


उन दिनों सब्जी पर होने वाले खर्चे का पता  तक नहीं चलता था। देशी टमाटर और मूली जाड़े के सीजन में बेहिसाब पैदा होती थी और  खिचड़ी के आते आते उनकी इज्जत घर में घर जमाई जैसी हो जाती थी। तब जीडीपी का अंकगणितीय करिश्मा नहीं था। ये सब्जियाँ सर्वसुलभ और हर रसोई का हिस्सा थीं। लोहे की कढ़ाई में किसी के घर रसेदार सब्जी पके, तो गाँव के दूर दूर तक के घरों में इसकी खुशबू जाती थी। शाम को रेडियो पे चौपाल और आकाशवाणी के सुलझे हुए समाचारों से दिन पूर्ण होता था। रातें बड़ी होती थीं। दूर कहीं कोई हरिया तानपुरे में कोई तान छेड़ देता तो ऐसा लगता मानों कोई सिनेमा चल गया हो । किसान लोगो में कर्ज का फैशन नहीं था।

ग्रामीण जीवन को लगी आधुनिकता की नजर :-


सदियों से ग्रामीण जीवन की खुशहाली की यही परंपरा देश व समाज की जीवन्तता का आधार थी. आधुनिक पाश्चात्य परंपरा के अंधानुकरण के बीच नई पीड़ी के बच्चे बड़े होने लगे.. बच्चियाँ भी बड़ी होने लगी। बच्चे सरकारी नौकरी पाते ही अंग्रेजी इत्र लगाने लगे। बच्चियों के पापा सरकारी दामाद में नारायण का रूप देखने लगे। किसान क्रेडिट कार्ड...... ....डिमांड और ईगो का प्रसाद बन गया। इसी बीच मूँछ बेरोजगारी का सबब बनी।

सामाजिक परिवर्तन:-


फिर एक दौर आया बिना मूछ वाले मूछमुंडे इंजीनियरों का. अब दीवाने किसान अपनी बेटियों के लिए खेत बेचने के लिए तैयार थे। बेटी गाँव से रुखसत हुई.. पापा के कानों को सुख देने वाला रेडियो साजन की टाटा स्काई वाली एलईडी के सामने फीका पड़ चुका था। अब आँगन में हरिया की बहू जो गाँव के सुखी जीवन में रची बसी थी. जो छाने व घर की दीवारों में अंगूर व तरकारी की लताएँ / बेल चढ़ाने में जीवन के कई रंग बिखेरती थी वही बिटिया पिया के ढाई बीएचके की बालकनी के गमले में कोरोटन का पौधा लगाने लगी ताकि घर की नकारात्मकता को समाप्त किया जा सके घर में खुशियाँ आ सकें और इसी जद्दोजहद में सब्जियाँ मंहँगी हो गईं। अब तो बगैर  रूपये खर्चे सब्जी तो दूर, शुद्ध हवा और पानी तक नसीब नहीं होता.

परिणाम / निष्कर्ष:-


इस लॉक डाउन पीरियड में सभी पुरानी यादें ताज़ा हो गई हैं. सच में उस समय सब्जी पर कुछ भी खर्च नहीं हो पाता था। जिसके पास नहीं होता उसका भी काम चल जाता था। दही मठ्ठे की भरमार रहती थी. सबका काम चलता था। मटर, गन्ना, गुड की सबके लिए इफरात रहती थी। इससे भी बड़ी बात तो यह थी कि जीवन में आपसी मनमुटाव रहते हुए भी एक दुसरे के प्रति अगाध प्रेम रहता था। आज की जैसी छुद्र मानसिकता दूर दूर तक नहीं दिखाई देती थी।

हाय रे ये आधुनिक शिक्षा व पश्चिम का अन्धानुकरण कहाँ तक ले आया है हमें ?? जीवन कितना क्रूर हो गया है.

आज हर आदमी एक दूसरे को शंका की निगाह से देख रहा है।

यक्ष प्रश्न यह है कि, क्या सचमुच हम विकसित हुए हैं ? या यह केवल एक छलावा भर है !!


हिंदी, हिन्दू, हिन्दुस्थान की परंपरागत जीवन शैली Traditional life style ही हमें सही अर्थों में जीवनोत्कर्ष प्रेरणा Life Inspiration दे सकती है.


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6/08/2020

Swadeshi तरीके से Emmunity बढायें और Corona भगाएँ.

Swadeshi तरीके से Emmunity बढाने वाले प्रोडक्ट का प्रयोग करें, इमुनिटी बढायें, Corona भगाएँ.

नमस्कार, 

आज बड़े भारी मन से यह पोस्ट लिखने के लिए बैठा हूँ. जैसा की लगातार यह चर्चा में बना हुआ है की 

कोरोना महामारी से कैसे बचाव किया जाय ?

वास्तव में कोरोना महामारी क्या है ? कहाँ से आई ? किसने पैदा करी ? जैसे कई सारे प्रश्न सभी लोगों के मन में पैदा हो रहें हैं. स्वभाविक भी है रोज हजारों की संख्या में लोग मर रहे हैं, बहुत घबराहट भी है, डर के मारे प्राण सूखे जा रहें हैं. यह सब अस्वभाविक नहीं है. मौत सामने दिखती है तो अच्छे अच्छोके होश उड़ जाते हैं. मौत का डर क्या होता है ? वही समझ सकता है, जिसको अगली श्वांस लेने में कठिनाई होती है. . . . . . बस-बस-बस इससे ज्यादा ना लिखा जायेगा . . . .!!!

इस डर को व्यक्त करना और लिखना भी तो एक प्रकार से पाप ही है . . . . . किसी को क्या अधिकार है, की वो किसी को डराए, . . . . नहीं-नहीं, मेरा डरने डराने का कोई इरादा कत्तई नहीं है, हम तो बस इतना चाहते हैं की हमारे सभी भाई बंधू, मित्र, परिचित, अपरिचित, दूर दराज के, आस-पास के, देश-विदेश मे रहने वाले सभी निरोगी व स्वस्थ रहें. भारत से, इतनी दूर से तो हम, उनके स्वास्थ्य की केवल मंगल-कामना ही कर सकते है. इसके अतिरिक्त सावधानी के रूप में, लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की सलाहों का अक्षरशः अनुपालन, emunity बढाने वाले पेय पदार्थों जैसे काड़ा इत्यादि का सेवन, व खाने पीने में सभी प्रकार की सावधानी बर्तने का अनुरोध वैश्विक सभी से है. हम भारतीय तो निश्चित ही winner side में ही रहेंगें, किन्तु इंसानी क्रूरता ने प्रकृति को इतना सताया है की अब वह इससे आगे केवल करुना वान प्रजाति को ही अपने साथ रहने का अधिकार देने वाली है.



अतः बस, अब और सताना, दिल दुखाना, रुलाना, मार-पीट के जान ले लेना. क्या कसूर है उन निरीह प्राणियों का . . . . . केवल इतना की वे मनुष्य का प्रतिकार नहीं कर सकते, उनसे अपना बचाव नहीं कर सकते. नहीं नहीं  बस अब और नहीं, प्रकृति ये सब और बर्दास्त नहीं करने वाली है. तो क्या करें . . . . ???

बहुत सुन्दर . . . . . अब हम सब मिलकर वही करें जो हमारे DNA में है. . . . . . ठहरिये-ठहरिये में कोई फिलोस्फिकल बात नहीं कहने जा रहा हूँ. . . . . में तो बस इतना सा कहना चाहता हूँ की हम अपनी दिन चर्या को सुधार लें बस. कठिन है क्या ???. . . . . दिन चर्या में बदलाव करना. . . . . लेकिन मित्र बड़ा दुःख होता है ये कहते हुये की ये तो करना ही पड़ेगा. में नहीं कह रहा हूँ में कौन होता हूँ कुछ कहने वाला. . . . लेकिन आप प्रकृति के सन्देश को स्पष्ट समझें यहाँ से आगे वह और क्रूरता की इजाजत इन्शानों को नहीं देने जा रही है.

तो अब क्या करें . . . . ???

1) भक्ष्य-अभक्ष्य का ध्यान रखकर अपने भोज्य पदार्थों का चयन करें.

2) यथासंभव मांसाहार से बचे. में तो कहूँगा साकाहारी बने.

3) गरिष्ट खाने से बचे. सदा ताजा व पोष्टिक भोजन ही करें.

4) विटमिन्स व मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में लें.

5) ठन्डे पानी से बचें. यथासंभव ना पियें. पेप्सी, कोक, आइसक्रीम व कुल्फी इत्यादि के सेवन से भी बचें. गर्म, सामान्य पानी पीने की आदत का भी हम यहाँ से एक अच्छी शुरुवात कर सकते है.

6) नोर्मल tea की जगह Green Tea की भी शुरुवात करने का ये एक अच्छा अवसर है. ग्रीन टी बगैर मीठे के पी जाती है अतः आप आसानी से suger intake की मात्रा भी कम कर सकते हैं. 

उपरोक्त बातें सामान्य हैं जो सामान्य दिनों में भी हमें आयुर्वेद  के अनुसार खान पान ठीक रखने के लिए प्रेरित करती हैं. किन्तु Corona काल में इन बातों का कड़ाई से पालन, हमें कोरोना से बचाव में सहायक है. 

इसके अतिरिक्त कोरोना से बचाव हेतु हमें निम्नलिखित चीजों को भी दिनचर्या मे शामिल करना होगा.

1) पीने में सदैव गुनगुने पानी का ही उपयोग करना है, फ्रिज के ठंडे पानी से बचना है.

2) चाय का सेवन यदि करते हैं तो अदरख व कालीमिर्च  के साथ करना लाभप्रद होगा.

3) सर्दी-जुकाम होने अथवा बुखार आने पर काडे का प्रयोग अविलम्ब शुरू कर दें. asimptimetic सभी लोग इससे ठीक हो जाते हैं.

असल में आधुनिक बनते बनते हम वहां पहुच गये हैं जहाँ देर सबेर सभी लोग, स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याओं से घिर ही रहे हैं. यदि गहराई से देखें तो कोरोना इंसानों को सचेत करने ही आया हैकोरोना समझा रहा है - 

1) निरीह प्राणियों को ना सतायें उनमे भी जीवात्मा का वास है.

2) केवल अपने सुख के लिए प्रकृति का अंधाधुन्द दोहन ना करें.

3) प्रकृति से जो कुछ भी अपने लिए लें बराबर मात्रा में प्रकृति को विनम्रता से लौटाएँ.

हम मनुष्य जीवन के, स्वामी तो हैं, लेकिन यहाँ (धरती) के, मालिक नहीं हैं. एक निश्चित समयावधि के बाद हमें ये दुनियां छोडनी ही है. अतः बड़े भाग्य से मिले इस मनुष्य जन्म को थोड़ी से असावधानी से गवाने से बचने का हर संभव प्रयास करना ही चाहिए. सरकारों ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है. हमें व हमारे देश को बचाने में. अतः उपरोक्त सभी प्रकार की सावधानियों व खान पान के अतिरिक्त शरीर की इम्युनिटी को बढाने के लिए योग, आसन व प्राणायाम को दिन चर्या में अनिवार्य रूप से शामिल करने की सलाह दी जाती है.

भारतवर्ष ने आज ही नहीं सदा से ही श्रेष्ठ जीवन पद्यति का अनुसरण किया है और सभी को इसकेलिए प्रेरित भी किया है. आज हमें गर्व है की ऋषि परम्परा के अग्रज परम पूज्य स्वामी रामदेव बाबा का योग  हमें सुलभ है. इस लिंक को क्लिक करके आप कोरोना से बचाव में सहायक योगाभ्यास आप सीख कर कोरोना को हराने में सफल हो सकेंगें.



मेरा आप सभी से नम्र निवेदन है की मेरे इस पोस्ट  " Swadeshi तरीके से Emmunity बढाने वाले प्रोडक्ट का प्रयोग करें, इमुनिटी बढायें, Corona भगाएँ. " को  ज्यादा से ज्यादा social media में facebook, whatsapp व twitter के माध्यम से शेयर कर कोरोना से जंग में सहयोग करेंगें. अपने सुझाओं से भी मुझे अवगत करेंगें ऐसी अपेक्षा है.   


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4/18/2020

विश्वास की ताकत

एक बार विश्वास की ताकत के दम पे दो बहुमंजिली इमारतों के बीच बंधी तार की रस्सी पर लंबा सा बाँस पकड़े एक नट चल रहा था, उसने अपने कन्धे पर अपना बेटा बैठा रखा था। सैंकड़ों, हज़ारों लोग दम साधे देख रहे थे।सधे कदमों से, तेज हवा से जूझते हुए अपनी और अपने बेटे की ज़िंदगी दाँव पर लगा उस कलाकार ने दूरी पूरी कर ली।

Power of Trust विश्वाश की ताकत
Power of Trust विश्वाश की ताकत

"प्रभु में विश्वास की ताकत "


भीड़ आह्लाद से उछल पड़ी, तालियाँ, सीटियाँ बजने लगी । लोग उस कलाकार की फोटो खींच रहे थे, उसके साथ सेल्फी भी ले रहे थे। उससे हाथ मिला रहे थे ।

अचानक वो कलाकार माइक पर आया और बोला  "क्या आपको विश्वास है कि मैं यह कार्य दोबारा भी कर सकता हूँ"

 भीड़ चिल्लाई "हाँ हाँ, तुम कर सकते हो।"

उसने पूछा, क्या आपको विश्वास है"

भीड़ चिल्लाई "हाँ हमें पूरा विश्वास है, हम तो शर्त भी लगा सकते हैं कि तुम सफलतापूर्वक इसे दोहरा भी सकते हो।"

कलाकार बोला " पूरा पूरा विश्वास है ना" 

भीड़ बोली......हाँ है।

कलाकार बोला "ठीक है, कोई मुझे अपना बच्चा दे दे, मैं उसे अपने कंधे पर बैठा कर रस्सी पर चलूँगा।"

खामोशी, शांति, चुप्पी फैल गयी।

कलाकार बोला, "डर गए अभी तो आपको विश्वास था कि मैं कर सकता हूँ। असल मे आप का यह विश्वास सिर्फ एक सोच है, भरोसा नहीं है।दोनों विश्वासों में फर्क है साहब।"

 जी हां, 

यही कहना है 
- ईश्वर हैं ये सोच तो है 
परन्तु 
ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास,भरोसा नहीं है, 


तो 


अतः हमें अपने जीवनोत्कर्ष के लिए विश्वास की ताकत से प्रेरणा लेनी चाहिए.

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